आह तहरीर हुई जाती है
शब की तामीर हुई जाती है
शब की तामीर हुई जाती है
चुप हुए जाते हैं सारे मंज़र
कोई तस्वीर हुई जाती है
सुब्ह होने से भी होता क्या है
रात तक़दीर हुई जाती है
हर घड़ी तीर चलाते हैं ख्याल
याद शमशीर हुई जाती है
बात गुलरेज़ हम जो कह न सके
अब वो गम्भीर हुई जाती है
गुलरेज़ शहज़ाद विचारोत्तेजक शायरी की परंपरा के युवा संवाहक हैं. आप एक बेहतरीन रंगकर्मी तथा जीवन मैग के सलाहकार भी हैं.
कोई तस्वीर हुई जाती है
सुब्ह होने से भी होता क्या है
रात तक़दीर हुई जाती है
हर घड़ी तीर चलाते हैं ख्याल
याद शमशीर हुई जाती है
बात गुलरेज़ हम जो कह न सके
अब वो गम्भीर हुई जाती है
गुलरेज़ शहज़ाद विचारोत्तेजक शायरी की परंपरा के युवा संवाहक हैं. आप एक बेहतरीन रंगकर्मी तथा जीवन मैग के सलाहकार भी हैं.
